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Do Dham Kedarnath Badrinath Yatra

केदारनाथ बद्रीनाथ यात्रा पैकेज बद्रीनाथ और केदारनाथ के उल्लेखनीय पर्यटन स्थल का दौरा है जो चारधाम यात्रियों का स्वागत करता है। बद्रीनाथ केदारनाथ यात्रा चारधाम यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है और हिंदू तीर्थ यात्रा के लिए प्रसिद्ध है। अक्सर हिंदू जनता को लगता है कि चार धाम गंतव्य मोक्ष का प्रतीक है। केदारनाथ बद्रीनाथ पैकेज, केदारनाथ बद्रीनाथ पैकेज टूर, केदारनाथ बद्रीनाथ यात्रा, धाम यात्रा, केदारनाथ बद्रीनाथ हेलीकाप्टर, केदारनाथ बद्रीनाथ तस्वीरें। समुद्र तल से 3580 मीटर की ऊंचाई पर स्थित केदारनाथ का भव्य और पुण्य मंदिर भगवान शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है और केदारनाथ बद्रीनाथ यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। नंदी की एक विशाल मूर्ति है जो आंगन में खड़ी है। केदारनाथ पीठ में बहुत सारे कुंड हैं और उनमें से शिव कुंड सबसे महत्वपूर्ण है। एक कुंड है जो लाल रंग में है और रुधिर कुंड के नाम से जाना जाता है। पूरी केदारनाथ घाटी तीन तरफ से बर्फ से ढकी चोटियों से घिरी हुई है और जगह की खूबसूरत तस्वीर बनाती है। दो प्रसिद्ध स्थल हैं जो मंदाकिनी ग्लेशियर और गांधी सरोवर नामक एक निकट द...

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति रह चुके बिल गेट्स के साथ एक अखबार बेचने वाले की कहानी

"दुनिया के सबसे धनवान व्यक्ति बिल गेट्स से किसी ने पूछा - 'क्या इस धरती पर आपसे भी अमीर कोई है ? बिल गेट्स ने जवाब दिया - हां, एक व्यक्ति इस दुनिया में मुझसे भी अमीर है। कौन -!!!!! बिल गेट्स ने बताया: एक समय मे जब मेरी प्रसिद्धि और अमीरी के दिन नहीं थे, मैं न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर था.. वहां सुबह सुबह अखबार देख कर, मैंने एक अखबार खरीदना चाहा,पर मेरे पास खुदरा पैसे नहीं थे.. सो, मैंने अखबार लेने का विचार त्याग कर उसे वापस रख दिया.. अखबार बेचने वाले लड़के ने मुझे देखा, तो मैंने खुदरा पैसे/सिक्के न होने की बात कही.. लड़के ने अखबार देते हुए कहा - यह मैं आपको मुफ्त में देता हूँ..  बात आई-गई हो गई.. कोई तीन माह बाद संयोगवश उसी एयरपोर्ट पर मैं फिर उतरा और अखबार के लिए फिर मेरे पास सिक्के नहीं थे।उस लड़के ने मुझे फिर से अखबार दिया, तो मैंने मना कर दिया। मैं ये नहीं ले सकता.. उस लड़के ने कहा, आप इसे ले सकते हैं, मैं इसे अपने प्रॉफिट के हिस्से से दे रहा हूँ.. मुझे नुकसान नहीं होगा। मैंने अखबार ले लिया...... 19 साल बाद अपने प्रसिद्ध हो जाने के बाद एक दिन मुझे उस लड़के की याद आयी और मै...

कुमाऊंनी होली

उत्तराखंड में भी कुमाऊंनी होली की खास पहचान है। दो तरीके से होली मनाई जाती है-बैठकी और खड़ी होली। बैठकी होली में रंगों का त्योहार रागों के साथ मनाया जाता है। पूरी रात इस मस्ती में गुजर जाती है और इस बीच पता नहीं चलता कि भोर कब हुई. बैठकी होली की उमंग कुमाऊंनी होली के दो रूप प्रचलित हैं-बैठकी होली और खड़ी होली. बैठकी होली यहाँ पौष माह से शुरू होकर फाल्गुन तक गाई जाती है. पौष से बसंत पंचमी तक अध्यात्मिक बसंत, पंचमी से शिवरात्रि तक अर्ध श्रृंगारिक और उसके बाद श्रृंगार रस में डूबी होलियाँ गाई जाती हैं. इनमें भक्ति, वैराग्य, विरह, कृष्ण-गोपियों की हंसी-ठिठोली, प्रेमी प्रेमिका की अनबन, देवर-भाभी की छेड़छाड़ सभी रस मिलते हैं. इस होली में वात्सल्य, श्रृंगार, भक्ति रस एक साथ मौजूद हैं. संस्कृति प्रेमी एवं युग मंच संस्था चलाने वाले जुहूर आलम कहते हैं कि बैठकी होली जैसे त्योहार को एक गरिमा देती है. होली मर्मज्ञ एवं संस्कृतिकर्मी रहे गिरीश तिवारी 'गिर्दा' कहते हैं, ‘‘बैठकी होली अपने समृद्ध लोकसंगीत की वजह से यहाँ की संस्कृति में रच बस गई है. यह लोकगीत न्योली जै...

बाखलीः पहाड़ की परंपरागत हाउसिंग कालोनी

खासकर उत्तराखंड के गांवों में घरों की लंबी श्रृंखला होती थी, जिसे बाखली (बाखई) कहा जाता है। पहाड़ में अनेक गांवों में ऐसी बाखली हैं, जिनमें सैकड़ों परिवार एक साथ रहा करते थे। आज के बदलते दौर में भी कई गांवों में ऐसी बाखली मौजूद हैं, जो सामाजिकता का संदेश देती हैं। इन्हें पहाड़ की परंपरागत हाउसिंग कालोनियां भी कहा जा सकता है। सामान्यतया घरों में बनने वाले व्यंजनों का आदान-प्रदान, एक-दूसरे के घरों में दुःख-तकलीफ तथा कामकाज में सहयोग और खासकर गांवों में रात्रि में बाघ आदि जंगली जानवरों के आने की स्थिति में घरों के भीतर-भीतर ही आने-जाने की यह व्यवस्था खासी कारगर साबित होती रही है।   इससे गांव के लोगों में आपसी संबंध भी काफी मधुर रहते हैं, क्योंकि लोग एक-दूसरे से अधिक गहराई तक जुड़े रहते हैं। इन घरों में जहां दरवाजे व खिड़कियों (द्वार-म्वाव) पर लकड़ी की नक्काशी पहाड़ की समृद्ध काष्ठ कला के दर्शन कराती है, वहीं निचली मंजिल में पशुओं के लिए गोठ, ऊपरी मंजिल में बाहरी कमरा-चाख (जहां चाख यानी अनाज पीसने के लिए हाथ से चलाई जाने वाली चक्की भी होती है), पीछे की ओर रसोई, बाहर की ओर पंछियों...

Char Dham Yatra - 2022

Char Dham Yatra   चार धाम की यात्रा शुरू हो चुकी है. अनेको लोग यात्रा के लिए अपने अपने घरो से प्रस्थान कर चुके है. कई लोगो के लिए चार धाम की यात्रा करना एक सुन्दर सपने के पुरे हो जाने जैसा है. सिर्फ भारत से ही नहीं बल्कि दुनियां के कई देशो से लोग चार धाम की यात्रा के लिए आते है. यहाँ की प्राकर्तिक सुन्दरता, प्राचीनता, और बर्फ से ढकी उत्तराखंड की पहाड़ियों के बीच बने चार धाम श्रधालुओं का मन मोह लेते है. लेकिन क्या आप जानते है चार धाम की यात्रा क्यों की जाती है? चार धाम कौन कौन से है? इन चारो धामों का निर्माण किसने करवाया? शायद कई लोग जो इन यात्रा को कर चुके है वे भी इसके इतिहास के बारे में उतना नहीं जानते. तो चलिए आज इस पोस्ट में हम आपको चार धाम  की यात्रा के बारे में बताते है. चारो धाम के नाम हिन्दू पुराणों के अनुसार बद्रीनाथ, द्वारका, जगन्नाथ पुरी और रामेश्वरम को चार धामों में गिना जाता है. इन धार्मिक स्थलों की यात्रा को चार धाम यात्रा कहा जाता था. लेकिन आज आप उत्तराखंड की जिस चार धाम यात्रा के बारे में जानते है असल में वह छोटी चार धाम...

Folk Dances Of Uttarakhand

उत्तराखंड के लोक जीवन में अलग ही ताल और लय है जिसकी छाप यहां के लोकगीत एवं लोकनृत्यों में साफतौर पर परिलक्षित होती है। यहां के लोकगीत नृत्य केवल मनोरंजन ही नहीं बल्कि लोक जीवन के अच्छे-बुरे अनुभवों एवं उनसे सीख लेने की प्रेरणा भी देते हैं। हालांकि आधुनिक परिवेश के समयचक्र में पहाड़ों में बहुत सारे लोकगीत नृत्य विलुप्त हो गए हैं लेकिन बचे हुए लोकगीतों और नृत्यों की अपनी विशेष पहचान है। यहां लगभग दर्जन भर लोकगीतों की विधाएं आज भी अस्तित्व में हैं जिनमें चैती गीत   चौंफला ,  चांछडी   और   झुमैलो सामूहिक रूप से किए जाने वाले गीत-नृत्य हैं। चौंफला गीत शरदकालीन त्योहारों में चांछडी और झुमैलों पहले ही शामिल थे लेकिन अब बासंती खुशी का विशेष गीत चौंफला भी इन त्योहारों में गाया जाने लगा है। झुमैंलो और चांछडी तथा चौंफला तीनों गीतों में पुरुष और महिलाओं की टोली बनाकर या एक ही घेरे में नृत्य किया जाता है। तीनों के नृत्य की शैली भिन्न है किंतु तीनों में श्रृंगार एवं भाव प्रधान होते है। थडिया गीत थडिया गीत भी इसी मौसम में गाया जाता है और ये गीत चौक तथा थडों (...

चम्पावत: आज लगभग सवा ग्यारह बजे चम्पावत

चम्पावत: आज लगभग सवा ग्यारह बजे चम्पावत से लोहाघाट की ओर जाते समय मारूती स्टीम कार संख्या यूपी-16-के-8119 के ऊपर चीड़ का पेड़ गिरने से उसमें सवार मुन्नी पाण्डेय, उम्र 54 वर्ष, पत्नी केशव दत्त पाण्डेय, निवासी छतार पुनेड़ी, चम्पावत तथा दुर्गा देवी उम्र 72 वर्ष, पत्नी स्व.प्रेमबल्लभ पाण्डेय, निवासी कनलगाव, चम्पावत की चिकित्सालय ले जाते समय मृत्यु हो गई। वाहन में सवार (चालक) विनोद चौधरी, निकट कलक्ट्रेट मामूली रूप से घायल हुए हैं। घटना चम्पावत से लगभग 3 किमी. लोहाघाट की ओर तिलोन के पास हुई। बताया जा रहा है कि कार सवार सभी लोग एक शादी समारोह में जा रहे थे  ......................................................... .viral news facebook... .................................................................